बचत खातों पर घटेगा ब्याज दर !

देश के बैंकिंग इतिहास में पहली बार सेविंग्स अकाउंट्स पर ब्याज दर घटाई जा सकती है। देश के दो बड़े सरकारी बैंकों ने बिजनस न्यूज चैनल टीवी18 से कहा है कि नोटबंदी की वजह से बैंकों में पैसे की भरमार होने के मद्देनजर ब्याज दर घटाने का फैसला लिया जा सकता है। इसका स्पष्ट मतलब है कि अगर फैसला हुआ तो बचत खातों में जमा पैसे पर कमाई घट जाएगी।

देश में अक्सर छोटी राशि बचा पाने वाले लोग सेविंग्स अकाउंट्स में ही पैसे जमा करते हैं। उन्हें जमा राशि पर 4 से 6 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। बचत खातों के लिए तय यह ब्याज दर लंबे समय से स्थिर है। लेकिन, 500 और 1,000 रुपये को चलन से बाहर करने की 8 नवंबर, 2016 की घोषणा से अभी बैंकों में नोटों का अंबार लगा हुआ है।

पंजाब नैशनल बैंक की एमडी और सीईओ ने सीएनबीसी टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कहा,’बैंकों ने जमा पर ब्याज दर में कटौती किए बिना एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) में बड़ी कौटती की है।’ उन्होंने कहा, ‘(लोन रेट) में जो मासिक कटौती हुई है, वह इस अवधि में आरबीआई की ओर से मिले फायदों के मुकाबले ज्यादा है।’

इधर, बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी और सीईओ पी एस जयकुमार ने भी इंटरव्यू में कहा, ‘बजट में वित्तीय अनुशासन, राजस्व घाटा काबू में होना और महंगाई दर कम रहना सकारात्मक बातें हैं। इसलिए, रेट कट की उम्मीद है। लेकिन, बैंकों ने लोगों को फंड में कटौती का फायदा पहले ही दे दिया है। ऐसे में अब (कर्जों पर) ब्याज दर कमने के आसार कम हैं।’

इसी महीने सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने एमसीएलआर में 0.9 प्रतिशत पॉइंट्स की कटौती की थी। अब उसका एक साल का एमसीएलआर 8% है। एमसीएलआर से होम लोन इंट्रेस्ट समेत विभिन्न कर्जों के लिए ब्याज दर का पैमाना तय होता है। देशभर के बैंकों ने नोटबंदी से आई नकदी की बाढ़ के मद्देनजर कर्ज सस्ते किए हैं। आरबीआई ने अप्रैल 2016 में एमसीएलआर का पैमाना लेकर आया। इसका मकसद केंद्रीय बैंक की ओर से नीतिगत ब्याज दर में किए बदलाव को बैंक दरों पर भी लागू करना है।

प्रेस रिलीज

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