बिहार का टॉपर कांड नेताओं के धन-स्खलन की बदबू है: राणा यशवंत

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गणेश कुमार गिरफ्तार हो गया. इसने झूठ बोला था. उम्र गलत बताई थी. बिहार में इंटरमीडिएट टॉपर का फर्जीवाड़ा सामने आया ! गिरीडीह से समस्तीपुर आकर इसने परीक्षा दी थी. ये बिहार का एक और रुबी राय कांड निकल गया ! दिनभर ऐसा ही कुछ सभी न्यूज चैनल बांच रहे हैं. एक बेचारे गणेश को पकड़कर चटनी बना डाली उसकी. इस साल १२ वीं में साढे सात लाख लड़के फेल हुए तो हल्ला हो गया कि पिछली बार का सबक सरकार ने लिया . इस बार कड़ाई का नतीजा देखिए- सिर्फ ३५ फीसदी बच्चे ही पास हुए. बस दो ही दिन बाद बाजी पलट गई. गणेश कुमार की पोल खुल गई. देश का सारा मीडिया समस्तीपुर के दूरदराज के उस मरियल से जगदीप नारायण स्कूल की तरफ लपक लिया. बेचारे गणेश पर अपना सारा ज्ञान उड़ेल दिया. पूछनेवालों में बहुतों से पूछिए कि सरगम क्या सिर्फ सारेगामापा है? अकलोल बकलोल सब बेचारे का तेल निकालने लगे. अरे इसको तो कुछ भी संगीत का नहीं आता और प्रैक्टिकल में ८२ परसेंट नंबर है. जैसे रिपोर्टर साहब ने खुद डिस्टिंक्शन ले रखी हो. रूबी राय ने पिछले साल क्या किया ? पॉलिटिकल साइंस को प्रोडिगल साइंस कह दिया था. आगे उसने यह भी जोड़ दिया था कि इसमें खाना बनाना सिखाया जाता है. रुबी राय क्या, उसके पिता तक गिरफ्तार हो गए, जैसे आज गणेश कुमार हो गया. सारी खबर गणेश कुमार और उसके फर्जीवाड़े तक सिमट कर रह जाएगी.
स्कूल किसका है यह भी पता कर लीजिए. रूबी राय हाजीपुर के जिस बिशुनराय कॉलेज से पढी थी उसका प्रिंसिपल बच्चा राय क्या है? रुबी राय कांड के बाद गिरफ्तार हो गया यही काफी है? कौन बहाल करता है शिक्षक? कौन देता है स्कूलों को मान्यता ? कौन सी सरकार सीना ठोक कर कहती है कि उसने शिक्षा पर बजट का २५ फीसदी रखा है? हां गणेश कुमार कमज़ोर है, रूबी राय बेवकूफ है लेकिन वो बिहार की प्रतिभाएं नहीं हैं. और ना ही टॉप करने में उनका कोई दोष है. जुगत जुगाड़, तामझाम-तिकड़म का खेल खेलनेवाले बिहार के मोटी चमड़ी और दमड़ी के नेताओं-दलालों ने बिहार में टॉपर कांड कर रखा है. धंधा है साहब, खांटी धंधा . ठेके पर नंबर दिलवाने का काम होता है. क्या है बिशुनराय कॉलेज और जगदीप नारायण स्कूल ? इसी धंधे का नाजायज पेट हैं . टॉपर पर मत जाइए और ना ही गोरखधंधे का शिकार हो रहे रुबी राय या गणेश कुमार पर जाइए. ये बिहार की शिक्षा के अनचाहे गर्भ हैं. उस राज्य की प्रतिभा – कटनी- दौनी करवाते हुए, खेत पटवाते हुए , गाय-गोबर की गंध से भरे दालान और गोशाले में खाट बिछाकर, झाड़ झंखाड़ के बीच अधेड़ से दिखनेवाले हॉस्टल में अपनी ज़रुरत का सारा काम करते हुए – देश में लोहा मनवाती है. जीवट के बच्चे हैं वहां. कभी गया आइए. बुनकरों के एक ही मोहल्ले से १४-१५ बच्चे आईआईटी में सेलेक्ट हो जाते हैं. पटना के पीजी हॉस्टल के सभी ३२ कमरे कभी कभी यूपीएसी के रिजल्ट के बाद खाली हो जाते हैं. छोटे छोटे जिलों-कस्बों से मेडिकल, इंजीनियरिंग, बीपीएससी, यूपीएससी, बैंक पीओ के नतीजे आपको सुनने को मिलते हैं. लेकिन वे बच्चे अपनी हाड़-हड्डी गलाकर, मां बाप की तरफ बार-बार देखकर, कुछ ना कुछ करने की बेचैनी लिए चलते हैं. वे अच्छा करते हैं. सर, वाकई अच्छा करते हैं. जो बच्चा आईआईटी क्वालिफाई करने के बावजूद बिहार की बारहवीं में फिजिक्स में फेल हो गया है- आप ज़रा उससे बात कीजिए. किसी भी राज्य के टॉपर को लाइए और उसके सामने बिठाइए. पता चल जाएगा प्रतिभा क्या होती है. वह बच्चा अकलोल-बकलोल मास्टर के ज़रिए कापी जंचवाने का शिकार हो गया. आप गणेश कुमार और रुबी राय को कुसुरवार मत मानिए. बिहार के शिक्षा मंत्री खुद प्राइवेट स्कूलों का नेटवर्क चलाते हैं. वे गणेश कुमार का बचाव कर रहे थे, रुबी राय का भी पहले किया था. आज दसवीं की अंग्रेजी की कॉपी, गणित का शिक्षक जांच रहा है, उसका रिजल्ट जब आएगा तब भी बड़ा बावेला होना तय है. समूचे राज्य की नाक कट जाती है. जबकि सच ऐसा है नहीं. हां वोट बैंक के चक्कर में अगरुआ-मंगरुआ को शिक्षा मित्र बनाकर नीतीश कुमार ने बिहार के भविष्य के साथ भद्दा मजाक किया है. ऊपर से बिहार बोर्ड और इंडटरमीडिएट बोर्ड में चोर-चुहार अधिकारियों को मुखिया बनाकर नंबर के खेल का पूरा ढांचा खड़ा करवा दिया. नंबर लेकर टॉप करने वाले उस गोरखधंधे की पैदाइश हैं. जो प्रतिभावान हैं वो पास होकर आगे निकल जाते हैं. क्योंकि उनकी कापी ना तो ठीक से जांची जाती है और ना ही उनमें अपने अधिकार के लिये लड़ने की समझ है. वो बस आगे निकलना चाहते हैं. आज ही एक वीडियो देख रहा था – मास्टर साहब दसवीं की कॉपी जांच रहे हैं और मोबाइल पर गाना सुन रहे हैं – जब लगावेलु तू लिपिस्टिक..जिला टॉप लागेलू. जब उनके दिमाग में लिपिस्टिक वाली का सुनहरा ख्वाब हिचकोला मार रहा होगा तो वे बच्चे का अच्छा बुरा लिखा क्या समझेंगे. जो समझ में आएगा – नंबर दे देंगे. बेचारा वही मार्क्सशीट लेकर घर-दुआर, खेत-बथान का दुख-दरद समेटे आगे निकल जाएगा और एक दिन किसी बड़े ओहदे पर देश का काम करेगा. बिहार में स्कूलों का पूरा सिस्टम भांग खाकर चल रहा है. मंत्रियों, नेताओं, ठेकेदारों, दलालों ने प्राइवेट स्कूलों का धंधा चला रखा है . दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों या फिर मान्यता प्राप्त स्कूलों में पास करवाने, नंबर दिलवाने का ठेका लेकर एक अलग गैंग फलफूल रहा है. बिहार की प्रतिभाओं को मत कोसिए. इस देश की नौकरशाही पर नजर डाल लीजिए. मीडिया के माहिर लोगों को गिन लीजिए, बैंगलोर से लेकर अमेरिका तक की जानी मानी आईटी फर्म की जानकारी इकट्ठा कर लीजिए. अंदाजा हो जाएगा, कैसी प्रतिभाएं हैं बिहार में. ये टापर कांड नेताओं के धन-स्खलन की बदबू है बस. इनपर आइए. इनको गिरफ्तार करवाइए. इनके कपड़े उतारिए. इन कमबख्तों ने पूरे राज्य में गिरोह खड़ा कर रखा है गरीब मां बाप के सपनों का धंधा करने का. हिसाब तो बॉस इनका होना चाहिए.