मां के दूध’ को ललकार, क्या ‘साधना’ चाहते हैं राजनाथ?

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ये क्या बोल गए राजनाथ? क्षमा करेंगे, ‘देखेंगे उसने कितना मां का दूध पिया है,’ वाली केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की ललकार को देश ने स्वीकार नहीं किया है। स्वयं उनकी पार्टी भाजपा और राजनाथ के निजी प्रशंसक भी अचंभित हैं। देश के sn-vinod-002सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके राजनाथ सिंह केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में एक अच्छे प्रशासक की छवि के धारक बन रहे हैं। चाहे मामला कानून व्यवस्था का हो, या फिर सीमा पर पाकिस्तानी घुसपैठ का, जरूरत के अनुसार कठोरता के साथ कदम उठाने वाले राजनाथ सिंह सच पूछिये तो एक राष्ट्रीय विकल्प के रूप में भी देखे जाने लगे हैं। लोग उनमें राष्ट्रीय नेतृत्व की झलक देखने लगे हैं। अनुभवी, परिपक्व राजनेता राजनाथ सिंह स्वयं भी अपनी इस नई उपलब्धि से अवगत हैं। इस पार्श्व में मां के दूध वाली हल्की टिप्पणी! लगता है देश में राजनीति के गिरते स्तर ने उन्हें भी अपने आगोश में ले लिया है। हां, राजनीति का स्तर अब गिरकर पनाले की धारा का रूप लेने लगा है। और, पनाले से दुर्गंध तो निकलेगी ही। चूंकि, इस दुर्गंध में राजनीति समाहित है, कोई आश्चर्य नहीं, अंंतत: यह विकराल सांप्रदायिक रूप ले पूरे देश को हिंसक परिणति के साथ विभाजित कर डाले। राजनाथ की इस ताजा टिप्पणी के पार्श्व में भी सांप्रदायिकता ही है।
सांप्रदायिक तनाव के लिए कुख्यात उत्तर प्रदेश के कैराना की धरती पर जब देश के गृह मंत्री बोलें कि हमारी ‘भाजपा की सरकार’ बनने दीजिए, फिर हम देखेंगे कि ‘उसने’ कितना मां का दूध पिया है, तो साफ है कि गृह मंत्री दूसरी कौम को ललकार रहे हैं। राजनाथ की टिप्पणी के पूर्व कैराना का प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने आरोप लगाया था कि ‘मुस्लिम लोगों की वजह से वहां के हिन्दू पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।’ हुकुम सिंह के इस उद‍्बोधन के बाद  राजनाथ की ललकार के मायने साफ हैं। हुकुम सिंह आवेश में यहां तक बोल गए थे कि ‘आप लोगों की (हिन्दू) जान बचाने के लिए मैं सांप्रदायिक होने के लिए तैयार हूं।’ क्या इंगित करता है ये? क्या यह सांप्रदायिकता की आग में घी डालना नहीं है? और, जब हुकुम सिंह आगे सार्वजनिक मंच से जानकारी देते हैं कि गृह मंत्रालय और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उनसे कैराना पर जानकारी लेते थे, तब क्या यह निष्कर्ष निकाला जाए कि हुकुम सिंह और राजनाथ किसी सुनियोजित योजना को अंजाम दे रहे हैंं? ध्यान रहे, उत्तर प्रदेश में विधानसभा के लिए चुनाव होने जा रहे हैं। यह दोहराना ही होगा कि उत्तर प्रदेश का चुनाव परिणाम भाजपा के राजनीतिक भविष्य को निर्धारित करेगा। भाजपा की चिंता हम समझ सकते हैं, किंतु यह प्रवृत्ति पूरे देश के लिए खतरनाक है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
एक ओर जब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे के साथ मुसलमान भाइयों को राष्ट्रभक्त घोषित कर रहे हैं, उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं, उनके उत्थान, उनके विकास के लिए नई-नई योजनाओं की घोषणाएं कर रहे हैं, तब देश के गृह मंत्री की उनको ललकार कि भाजपा सरकार बनने के बाद हम देख लेंगे कि ‘उसने कितना मां का दूध पिया है!’ घोर आपत्तिजनक है। सिर्फ आपत्तिजनक ही नहीं, ये तो पूरे देश की एकता, अखंडता की नींव पर कुठाराघात है। देश ने इसे अस्वीकार कर दिया है। बेहतर हो, राजनाथ सिंह और उनकी पार्टी तथा सरकार भी क्षमा मांगते हुए इसे खारिज कर दें।
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