पुत्र मोह छूटता नहीं, भाई का साथ छोड़ेंगे नहीं

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समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने पिछले एक हफ्ते में तीन बार अपने बयान बदले हैं। तीन महीने लंबी खींचतान के बाद मुलायम सिंह से उनके बेटे अखिलेश ने पार्टी की कमान अपने हाथ में ली। तमाम कोशिशों के बावजूद मुखिया मुलायम को बेटे को नेता मानना पड़ा। हां-ना करते करते चुनाव की तारीखें बिल्कुल पास आ गई और उम्मीदवारों की घोषणा अपने अंतिम दौर में पहुंच गई।

लेकिन मुलायम सिंह यहीं नहीं रुके। बार बार बयान देते रहे। ताजा बयान में मुलायम सिंह ने कहा है कि ”मैं 9 फरवरी से जसवंतनगर से शिवपाल यादव के लिए चुनाव प्रचार शुरू करूंगा, अखिलेश के लिए चुनाव प्रचार बाद में करूंगा। पहले मुलायम सिंह ने २९ जनवरी को ने सपा-कांग्रेस अलायंस के लिए चुनाव प्रचार करने से साफ इनकार कर दिया था। दो दिन बार थोड़े पिघले और संकेत दिए कि वो पार्टी के चुनाव प्रचार में हिस्सा लेंगे, मुलायम ने समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों को शुभकामनाएँ भेजीं। लेकिन एक हफ्ते के भीतर अब मुलायम सिंह का नया बयान साफ संकेत देता है कि कुनबे की तकरार अभी खत्म नहीं हुई है।

जहां एक तरफ मुलायम ने अब यह ऐलान किया है कि वो ९ फरवरी से पहले भाई शिवपाल यादव के लिए चुनाव प्रचार करेंगे बाद में बेटे के लिए प्रचार करेंगे वहीं रामगोपाल यादव ने कहा है कि सपा का प्रचार कौन करता है, कौन नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। इतना ही नहीं रामगोपाल ने तीन दिन पहले इटावा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सभी शिवपाल समर्थक उम्मीदवार इस बार चुनावी रण में मुंह की खाएंगे और बुरी तरह हारेंगे।

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