शेखर गुप्ता दलाल हैं : देखिए, एक मुख्यमंत्री की भाषा

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जिस पार्टी के नेता का सेक्स वीडियो दुनिया के मशहूर पॉर्न वेबसाइट पर धूम मचा रहा हो उस पार्टी के मुखिया से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है। आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल वैसे तो अपने झूठ और अहंकार के लिए कुख्यात हैं लेकिन धीरे धीरे उनकी बदजुबानी परवान चढ़ रही है। वरिष्ठ पत्रकार और इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व ग्रुप एडिटर शेखर गुप्ता के एक सवाल उठाने पर अरविंद इस कदर को भड़क गए कि उनको दलाल तक कह डाला। शेखर गुप्ता ने दिल्ली में पांच साल बाद मलेरिया से हुई एक मौत के बाद चिकनगुनिया से कल हुई मौत का हवाला देते हुए दिल्ली की स्वास्थ्य-सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाया और कहा कि पहले दिल्ली को सुरक्षित करें फिर पंजाब, गोवा और गुजरात जीतने की बात हो । बस फिर क्या था अरविंद केजरीवाल शेखर गुप्ता पर भड़क गए और कहा कि ये पहले कांग्रेस की दलाली करते थे और अब मोदी की। इन्हीं लोगों ने पत्रकारिता को गंदा किया है। अरविंद यहीं नहीं रुके दूसरा ट्वीट किया कि दो शब्द अपने मालिक के बारे में भी बोल दो दुनिया जीतने चले हैं।

एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछने के एवज में जिस किस्म की भाषा अरविंद केजरीवाल ने इस्तेमाल की है वो निहायत ही आपत्तिजनक और घटिया है। जब अपने नेताओँ के बारे में आरोप लगने पर अरविंद गला फाड़ कर चिल्लाते हैं कि गुनाह साबित करो तो ऐसे मामले में कुछ बोलने से उन्हें कुछ सोचना चाहिए। अगर अरविंद ने शेखर गुप्ता को दलाल कहा है तो उन्हें साबित करना चाहिए कि शेखर दलाल हैं अन्यथा ऐसी भाषा से परहेज करना चाहिए। दरअसल अरविद केजरीवाल और उऩका पूरा गैंग ऐसे ही बयानों से सुर्खियों में बने रहना चाहता है। कुछ ऐसी हरकतें करता रहता है जिससे वो दुनिया और मीडिया की नजर में बना रहे। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष का गांधी-नेहरू को दिया गया बयान तो अभी ताजा है। अरविंद केजरीवाल खुद इस देश के प्रधानमंत्री को उऩकी गरिमा का ख्याल किए बिना मानसिक रोगी और न जाने क्या क्या कह डाला है।

आम आदमी पार्टी में जो नेता या मंत्री पार्टी की खामियो को उजागर करने की कोशिश करता है उसे बाहर कर दिया जाता है और दूसरे चापलूस किस्म के लोग जो आए दिन किसी न किसी घटिया हरकत में लिप्त पाए जाते हैं उजागर होते रहते हैं, पार्टी के कर्णधार बने हुए हैँ। अरविंद केजरीवाल की ऐसी हरकत खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी है। आए दिन अपनी पार्टी के नेताओं की कारगुजारियों से परेशान पार्टी के मुखिया अपनी भावना और जुबान पर काबू नहीं रख पा रहे हैं।

किसी व्यक्ति पर कोई भी आरोप लगाने से पहले अरविंद केजरीवाल को उसके पक्ष में तथ्य पेश करना चाहिए। साथ ही उन पत्रकारों के बारे में भी अरविंद को बताना चािहए जो उनकी पार्टी का बीट कवर करते करते उऩकी पार्टी के कार्यकर्ता हो गए, कुछ उनकी दलाली करते करते दिन-रात अपने स्क्रीन को रंगते रहे और फिर पार्टी में शरीक हो गए। अरविंद केजरवाल को यह भी बताना चाहिए कि वो पत्रकार किस किस्म की दलाली कर रहे थे जो उनके संगठन और पार्टी के कोर बैठकों में शरीक होते थे । अरविंद केजरीवाल को यह भी बताना चाहिए कि सत्ता में आऩे के बाद किस डर से सचिवालय में अधिकृत पत्रकारों के अंदर जाने पर रोक लगा दी और उऩके चहेते किस हैसियत से आज भी सारा दिन वहीं गुजारते हैं।

कई बार लगता है कि इस पार्टी और इस व्यक्ति के बारे में बात करना मूर्खता है लेकिन जिस तरीके इनलोगों ने दिल्ली की जनता को मूर्ख बनाया है और जिस किस्म की यह बयानबाजी करते हैं उसके बाद इनको इनकी सूरत और सीरत दिखाना भी जरुरी हो जाता है। जिस किस्म का बयान अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया है वो किसी भी सूरत में मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। दिल्ली ने मुख्यमंत्री ने मूर्खमंत्री चुना है।